रविवार को वालकेश्वर से भुलेश्वर तक जैनों की महारथ यात्रा निकलेगी, हजारों श्रावक-श्राविकाएं होंगी शामिल
मुंबई, 8 अक्टूबर ( TGN ): मुंबई के प्रमुख मार्गों पर रविवार को 50 से अधिक जैन संघों द्वारा भव्य महारथ यात्रा का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों की संख्या में जैन समाज के लोग शामिल होंगे। महारथ यात्रा का शुभारंभ सुबह 8.30 बजे वालकेश्वर स्थित चंदनबाला संघ से होगा और भुलेश्वर के लालबाग संघ में धर्मसभा के साथ इसका समापन होगा।
महारथ यात्रा में आठ रथ, 20 पालखियां, 15 बैंड, 52 संघों की 52 बग्गियां, 12 मंडलियां, लाइव रंगोली, दो पाठशालाओं के बच्चों की बग्गी, एक साउथ इंडियन मंडली, चार बग्गियों में चार समुदायों के नायक पूज्य गुरुदेवों की छवियां, चार तुतारियां, आठ अंगदाव करतबी, आठ भाला करतबी, 10 विंटेज गाड़ियां, पुरिमताल का एक फ्लोट, गिरिसेवा एवं सिद्धगिरिराज का एक फ्लोट तथा दीक्षार्थी का एक फ्लोट शामिल होगा। इसके अलावा 30 ध्वज और सोलापुरी मंडली भी यात्रा की शोभा बढ़ाएगी। महारथ यात्रा के मार्ग में इत्र की फुहार की व्यवस्था भी की जाएगी।
महारथ यात्रा के आयोजकों का कहना है कि शास्त्रवचनों एवं मर्यादाओं के साथ संगठित हुए संघ स्वाभाविक रूप से जिनाज्ञा के अनुरूप एकता को भी स्थापित करते हैं।
इस महारथ यात्रा में भिवंडी से लेकर भायखला तक तथा नालासोपारा से लेकर वालकेश्वर और मध्य मुंबई तक के सभी संघ शामिल होंगे। पाठशालाओं के बाल श्रावक जैन शासन का जयघोष करते हुए जैन धर्म के पवित्र संदेश का प्रसार करेंगे। महारथ यात्रा की सभी झांकियों एवं साज-सज्जा को श्री तीर्थंकर परमात्मा की भक्ति के रूप में समर्पित करने के लिए तैयार किया गया है। 20 पालखियों में 20 रजत श्री तीर्थंकर परमात्मा की प्रतिमाएं विराजमान की जाएंगी।
अवसर्पिणी काल का प्रथम समवसरण जिस भूमि पर रचा गया था, उस पुरिमताल की पवित्र भूमि पर आकार ले रहे भव्य समवसरण मंदिर की रचना तथा पवित्र श्री शत्रुंजय महातीर्थ की रचना के माध्यम से गिरिसेवा का स्मरण कराया जाएगा। प्रभुजी के रथों को भी बड़ी संख्या में जैन युवा पूजा के वस्त्र धारण कर अपने हाथों से खींचेंगे।
तपागच्छ के सबसे विशाल समुदाय सूर्यरामचंद्र महाराज के समुदाय तथा सूरिशांतिचंद्र और सिद्धिसूरीश्वरजी महाराज के समुदाय के मध्य मुंबई में विराजमान पूज्य सूरिवरों, पदस्थ भगवंतों, मुनिवरों एवं श्रमणीगण आदि की निश्रा में इस महारथ यात्रा का आयोजन किया गया है।
आचार्य श्री विजय रामचंद्रसूरीश्वरजी महाराज द्वारा रोपा गया और आज वटवृक्ष की तरह विस्तारित चार समुदायों का आध्यात्मिक विरासत-वृक्ष — आचार्य श्री सिद्धि सूरीश्वरजी महाराज, आचार्य श्री रामचंद्र सूरीश्वरजी महाराज, आचार्य श्री अमृत सूरीश्वरजी महाराज और आचार्य श्री शांतिचंद्र सूरीश्वरजी महाराज — इन चारों समुदायों के 52 से अधिक संघ इस महारथ यात्रा में शामिल होंगे।
